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वासनाओ से मुक्ति कैसे हो ?

वासनाओ से मुक्ति कैसे हो ?

आज मनुष्य का जीवन वासनाओ का एक युद्ध भर रह गया है. हम सारा दिन यहाँ से वहां भागते रहते हैं किसी मकसद को पाने के लिए और यहाँ तक की जब वह मकसद मिल जाता है तो भी खुश नहीं होते बल्कि और नई वासना पाल लेते हैं.
उदाहरण के लिए जब मोटरसाइकिल ले लेते हैं तो कार की कामना जग जाती है और जब कार ले लेते हैं तो बड़ी कार या प्लेन की.
अगर कूलर लेते हैं तो A. C. और A. C. ले लिया तो स्प्लिट A. C. यह सिलसिला कभी रुकता नहीं.
मैं आपके आराम करने के विरुद्ध नहीं हूँ न ही तरक्की करने के रस्ते में रोड़ा बनना चाहता हूँ तरक्की किसे अच्छी नहीं लगती. पर ऐसी तरक्की का क्या लाभ जो आनंद उपलभ्द न हो .
वासनाओं से मुक्ति का एक ही आधार है सम रहना ख़ुशी- गमी , उतार-चढ़ाव, जीवन- मृत्यु यह जीवन के अभिन्न अंग है या यूँ कह लो इनके बिना जीवन संभव नहीं है. अगर गम न हो तो ख़ुशी का कैसे पता चलेगा . अगर बच्चा गिरेगा नहीं तो उठना कैसे सीखेगा.
तो सूत्र यह है की आपको किसी बात को दिल पर नहीं लगाना. खुश रहना है. ख़ुशी वस्तुओं में नहीं आपके अंदर है. मुसीबते आपको परखने और मजबूत करने के लिए आती हैं .
एक छोटी सी कहानी कहूंगा ता की आपको अच्छे से समझ आ जाये की आनंद आपकी सोच पर टिका है परिस्थिति या घटना पर नहीं.
एक बार एक व्यापारी था उसका एक बहुत प्यारा घोड़ा था उसे वह बहुत प्यार करता था. उसे चोर चुरा कार ले गए.
अगले दिन सुबह लोगों ने देखा की वह बाजार में मिठाई बाँट रहा है. लोगो ने हैरानी वश पूछा की तुम्हारा प्यारा घोड़ा चोरी हो गया और तुम
मिठाई बाँट रहे हो. तो वह हसते हुए बोलै घोड़ा तो चला गया पर व्यापारी तो बच गया अगर चोर मुझे भी मर जाते तो क्या होता. मैं तो अपने बचने की ख़ुशी में मिठाई बाँट रहा हूँ.
तो पैसे या वस्तुए सिर्फ काम चलाने के लिए होती हैं इनको इस से ज्यादा मोल नहीं देना चाहिए. इस दुनिया में वही इंसान खुश रहता है जो अपनी जरूरते कम रखता है .
अब अगर आप सफर पर जा रहे हो और बोझा भरकर सिर पर रख लिया तो क्या फायदा . बोझ से मुक्त होकर जिंदगी का सफर करो जितने ज्यादा बंधन और व्यसन पालोगे उतने ही दुखी होंगे.
धन्यवाद् 
रविन्द्र शर्मातकनीशियन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट,संत लोंगोवाल अभियांत्रिक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, लोंगोवाल, पंजाब-१४८१०६

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