ad02jan2018

।।सुप्रभातम।।

।।सुप्रभातम।।


कलश से पूछा गया कि तुमने ऐसा क्या,
पुण्य किया है कि सबके सिर पर विराजते हो।

उसने कहा कि मिट्टी के रूप में था,
तब पैरों में गूंथा गया।

बनने के बाद धूप में तपा,
फिर अग्नि में जलाया गया।

इतनी साधना और अपमान,
के बाद तुम्हारे सिर पर आया हूं।

जीवन में साधना और,
अपमान को विष नमानकर।

इसको अपने सम्मान का,
अमृत बना लेना चाहिए।

((आपका दिन शुभ और मंगलमय हो))

Comments

Popular posts from this blog

A Modern Approach to Logical Reasoning and Quantitative aptitude (Mathematics) (R.S. Aggarwal) pdf link

विश्व परिवार दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाऍ (Happy World Family Day)