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क्या करें????

बच्चे बात नहीं मान रहे हैं तो क्या करें ?

बात समझने वाली है. गंभीर नहीं है पर सूक्ष्म है. बच्चे नहीं समझ रहे हैं या हम नहीं समझ रहें हैं . 
बच्चों का मन चंचल होता है जो स्कूल के काम में भी आनन्द पाना चाहता है . हम चाहते हैं कि वो जल्दी से काम खत्म करें तांकि हम अपने किसी जरूरी काम जैसे कि मोबाइल पर गेम खेलना या फेसबुक पर चैट करना या टी वी पर फ़िल्म देखना आदि कर सकें.
दरअसल बच्चा खेलना चाह रहा है पर हमारे पास उसके साथ खेलने का समय भी नहीं है कितने व्यस्त हो गए हैं हम अपने बच्चे के लिए समय नहीं दे सकते और बेकाम की चीजों के लिए समय खोज रहे हैं . फिर उसको कहते हैं कि जल्दी करो नहीं तो मार पड़ेगी . और कई बार तो गुस्से में चांटा जड़ भी देते हैं . चांटा कोई हल नहीं है दोस्तो यह समस्या को और जटिल कर देगा .
आपका बच्चा चांटे से ऑपरेट होने लग जायेगा जब तक चांटा नहीं पड़ेगा वह काम नहीं करेगा आपकी बात नहीं सुनेगा. और यह किताबी बात नहीं है वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर चुके हैं . सबसे पहले यह प्रयोग कुत्तों पर हुआ . एक कुत्ते को खाना देने से पहले घंटी बजाई जाती थी धीरे धीरे उसे आदत हो गयी अब जैसे ही घंटी बजती वह भागा भागा आता है .
उन्होंने इसको दूसरे तरीके से भी किया जो प्रक्षिक्षण में काम आ रहा है वह है अवार्ड सिस्टम . जब भी उसे किसी काम को करने को कहा जाता तो काम पूरा होने पर उसे इनाम के रूप में प्यार या कुछ खाने को पुरस्कार के रूप में दिया जाता और यह तरीका बहुत काम कर रहा है.
और अब यही प्रयोग रोजाना करते हैं जब बच्चे को कहते हैं अगर काम पूरा करोगे तो तुम्हे गुड मिलेगा या फर्स्ट आओगे तो इनाम मिलेगा. वार्षिक समारोह में सम्मानित किया जाएगा .
दोस्तो यह तरीका ही सही है हमे बच्चे को प्रोत्साहित करके , कॉम्पिटिशन की भावना जगाते हुए ही पढ़ाना चाहिए. मैं समझ सकता हूँ कि यह काम बहुत समय खाने वाला है पर आप यकीन मानिए यह आपको अपने बच्चों को और नजदीक से समझने का एक बेहतरीन अवसर देगा. अगर आप यह करने में सफल रहे तो आपका बच्चा फर्स्ट आने का मतलब जान जाएगा . और जो फर्स्ट आने का मतलब जान जाता है वह कभी भी फेल नहीं होता समय पर हर काम पूरा करता है.
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धन्यवाद 

रविन्द्र शर्मा
तकनीशियन 
केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट,
संत लोंगोवाल अभियांत्रिक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, लोंगोवाल, पंजाब-१४८१०६

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